Movie Review,Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya | मूवी रिव्यू- तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया: कृति-शाहिद की खूबसूरत अदाकारी; कॉन्सेप्ट अच्छा लेकिन ढंग से दिखाने में नाकाम


मुंबईकुछ ही क्षण पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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शाहिद कपूर और कृति सेनन स्टारर फिल्म 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' आज रिलीज हो गई है। - Dainik Bhaskar

शाहिद कपूर और कृति सेनन स्टारर फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ आज रिलीज हो गई है।

शाहिद कपूर और कृति सेनन स्टारर फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ रिलीज हो गई है। कॉमेडी ड्रामा जॉनर इस फिल्म की लेंथ 2 घंटे 23 मिनट है। दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है।

फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म की शुरुआत शाहिद कपूर के एक सीक्वेंस से होती है। फिल्म में शाहिद के किरदार का नाम आर्यन अग्निहोत्री है। आर्यन पेशे से एक प्रोग्रामर है, और रोबोट बनाने वाली कंपनी में काम करता है। आर्यन की फैमिली वाले उसकी शादी कराने के पीछे पड़े रहते हैं, लेकिन आर्यन को कोई लड़की समझ में ही नहीं आती है।

आर्यन इसी बीच अपने काम के संबंध में अमेरिका जाता है। वहां उसकी मुलाकात शिफ्रा (कृति सेनन) नाम की एक लड़की से होती है। शिफ्रा बिल्कुल उसी नेचर की है, जैसी आर्यन को दरकार है। आर्यन उसे अपना दिल दे बैठता है। हालांकि उसे तब धक्का लगता है, जब पता चलता है कि शिफ्रा इंसान नहीं बल्कि एक रोबोट है। यह जानते हुए कि शिफ्रा एक मशीन है, आर्यन उसे भूल नहीं पाता है।

आर्यन उससे शादी करना चाहता है। वो उसे अमेरिका से भारत लाता है, और अपनी फैमिली से मिलाता है। आर्यन अपने परिवार वालों से झूठ बोलता है कि शिफ्रा एक नॉर्मल लड़की है। अब शिफ्रा और आर्यन की फैमिली के बीच कैसी ट्यूनिंग होती है, क्या दोनों की शादी हो पाती है? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

फिल्म में शाहिद कपूर और कृति सेनन की केमेस्ट्री काफी अच्छी लगी है।

फिल्म में शाहिद कपूर और कृति सेनन की केमेस्ट्री काफी अच्छी लगी है।

स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है?
कृति सेनन और शाहिद कपूर दोनों ने मिलकर फिल्म को अंत तक चलाया है। स्पेशली कृति सेनन ने काफी अच्छा काम किया है। एक रोबोट के रूप में उनके एक्ट और एक्सप्रेशन कमाल हैं। वो पर्दे पर काफी खूबसूरत भी लगी हैं। शाहिद कपूर का जो कैरेक्टर रखा गया है, उस हिसाब से उन्होंने बढ़िया काम किया है। हालांकि उनसे और बेहतर काम निकलवाया जा सकता था।

सपोर्टिंग एक्टर्स में शाहिद कपूर के दादा के रोल में धर्मेंद्र का काम सबसे लाजवाब है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी कॉमिक टाइमिंग गजब की है। वो जितनी देर स्क्रीन पर दिखे, मजेदार ही लगे हैं। शाहिद कपूर की मौसी और रोबोट बनाने वाली कंपनी की मालकिन बनीं डिंपल कपाड़िया भी प्रभावशाली लगी हैं।

शाहिद कपूर और कृति सेनन ने पहली बार स्क्रीन शेयर किया है।

शाहिद कपूर और कृति सेनन ने पहली बार स्क्रीन शेयर किया है।

डायरेक्शन कैसा है?
फिल्म की राइटिंग और डायरेक्शन अमित जोशी और आराधना शाह की जोड़ी ने मिलकर किया है। डायरेक्शन में काफी जगह खामियां हैं। फिल्म का कॉन्सेप्ट काफी रिफ्रेशिंग है, लेकिन इसे पर्दे पर सही ढंग से दिखा नहीं पाया गया है। स्कीनप्ले भी काफी बिखरा हुआ है। कई सीन में खूब हंसी आती है, तो कई सीन बोरिंग भी लगते हैं। निरंतरता की भारी कमी है।

रोबोट शिफ्रा जिस तरह आर्यन की फैमिली में जाती हैं और वहां का रहन-सहन सीखती है, इस पूरे सीक्वेंस को और मजेदार बनाया जा सकता था। कुछ सीन तो बिना मतलब खींचे गए हैं। फिल्म को 15-20 मिनट और छोटा किया जा सकता था।

फिल्म का म्यूजिक कैसा है?
फिल्म का म्यूजिक इसके सबसे बड़े पॉजिटिव पॉइंट्स में से एक है। ‘तेरी बातों’ और अंखियां गुलाब जैसे गाने पहले से लोगों के जुबान पर चढ़े हुए हैं। इन गानों में शाहिद और कृति के डांस नंबर्स भी देखने लायक हैं। इस फिल्म में काफी दिनों बाद आपको शाहिद कपूर का टिपिकल डांस भी देखने को मिलेगा। उनके डांस मूव्स कमाल के हैं।

फिल्म के गाने काफी फेमस हो रहे हैं। फिल्म का म्यूजिक पॉजिटव पॉइंट है।

फिल्म के गाने काफी फेमस हो रहे हैं। फिल्म का म्यूजिक पॉजिटव पॉइंट है।

फिल्म का प्रोडक्शन मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले हुआ है। दिनेश विजन इसके प्रोड्यूसर हैं।

फाइनल वर्डिक्ट, देखें या नहीं?
काफी लोगों को फिल्म का कॉन्सेप्ट बिना लॉजिक के लग सकता है, लेकिन यह फिल्म कहीं न कहीं फ्यूचर पर भी इशारा करती है। जिस तरह से टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, हो सकता है कि आने वाले वक्त में रोबोट इंसानों की तरह ही हमारे आस-पास घूमें। अगर आपको एक इंसान और मशीन के बीच की लव स्टोरी देखनी हो तो इसके लिए बिल्कुल जा सकते हैं।

कुछ लोगों को इसे देख रजनीकांत की फिल्म ‘रोबोट’ की याद आ सकती है, हालांकि उसमें रोबोट को इंसान से प्यार होते दिखाया गया है। इस फिल्म में उल्टा इंसान को रोबोट से प्यार होता है। अब इसके लिए उस इंसान को क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं, फिल्म में इसी कहानी को फनी अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है। अगर आपके पास भरपूर समय है और इस वीकेंड कुछ कॉमेडी फिल्म देखना चाहते हैं, तो एक बार जा सकते हैं।

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