Veteran Actress Asha Parekh Admitted to Kokilaben Hospital, She is battling with breast cancer | ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही हैं वेटरन एक्ट्रेस आशा पारेख: 82 वर्षीय एक्ट्रेस ने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में करवाया ट्रीटमेंट


कुछ ही क्षण पहले

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वेटरन एक्ट्रेस आशा परेख रविवार को मुंबई के कोकिलाबेन हॉस्पिटल में भर्ती हुईं। यहां उन्होंने अपना ब्रेस्ट कैंसर ट्रीटमेंट करवाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 81 वर्षीय एक्ट्रेस को रविवार सुबह 8 बजे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। यहां ऑपरेशन थिएटर में दो घंटे तक उनकी सर्जरी हुई।

2022 में मिला दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड
60 से 70 के दशक की सबसे मशहूर एक्ट्रेस रहीं आशा पारेख को 2022 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। ये इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का सर्वोच्च अवॉर्ड है। ये अवॉर्ड एक्ट्रेस को फिल्म इंडस्ट्री में दिए उनके योगदान के लिए दिया गया था।

68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आशा पारेख को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था।

68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आशा पारेख को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था।

22 साल बाद किसी महिला को मिला था यह अवॉर्ड
आशा पारेख को यह सम्मान 68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में दिया गया था। इस पहले दादा साहेब फाल्के से सम्मानित की जाने वाली आखिरी महिला सिंगर आशा भोसले थीं। उन्हें 2000 में यह अवॉर्ड दिया गया था। आशा पारेख से पहले आशा भोसले, लता मंगेशकर, दुर्गा खोटे, कानन देवी, रूबी मेयर्स, देविका रानी भी इस अवॉर्ड को हासिल कर चुकी हैं। साल 1969 में देविका रानी ये अवॉर्ड हासिल करने वाली पहली एक्ट्रेस थीं।

डांस अकेडमी और हॉस्पिटल भी चलाती हैं आशा
2 अक्टूबर 1942 को आशा का जन्म मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। गुजराती परिवार में जन्मी आशा वर्तमान में डांस अकेडमी ‘कारा भवन’ चला रही हैं। इसके अलावा, सांता क्रूज, मुंबई में उनका हॉस्पिटल ‘बीसीजे हॉस्पिटल एंड आशा पारेख रिसर्च सेंटर’ भी चल रहा है।

आशा को इंडस्ट्री में 'जुबली गर्ल' के नाम से भी जाना जाता था।

आशा को इंडस्ट्री में ‘जुबली गर्ल’ के नाम से भी जाना जाता था।

10 साल की उम्र में शुरू की थी एक्टिंग
आशा ने महज 10 साल की उम्र में एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। 1952 में रिलीज हुई फिल्म ‘आसमान’ में उन्होंने पहली बार बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था। इसके बाद बिमल रॉय की फिल्म ‘बाप बेटी’ (1954) में उन्होंने काम किया, लेकिन इसकी असफलता ने उन्हें इस कदर निराश किया कि उन्होंने फिल्मों में काम न करने का फैसला ले लिया।

16 की उम्र में किया बॉलीवुड में कमबैक
इसके बाद आशा ने 16 साल की उम्र में फिल्मों में वापसी का फैसला लिया। वे विजय भट्ट की फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ (1959) में काम करना चाहती थीं, लेकिन डायरेक्टर ने उन्हें यह कहकर चांस नहीं दिया कि वे स्टार मटेरियल नहीं हैं। हालांकि, दूसरे ही दिन उन्हें प्रोड्यूसर सुबोध मुखर्जी और डायरेक्टर नासिर हुसैन ने अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ (1959) में साइन कर लिया।

1959 में रिलीज हुई फिल्म 'दिल देके देखो' के एक सीन में शम्मी कपूर के साथ आशा पारेख।

1959 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल देके देखो’ के एक सीन में शम्मी कपूर के साथ आशा पारेख।

‘दिल देके देखो’ से रातों रात बनीं सुपरस्टार
इस फिल्म में शम्मी कपूर उनके अपोजिट रोल में थे। फिल्म सुपरहिट साबित हुई और आशा रातों रात बॉलीवुड की सुपरस्टार बन गईं। इस फिल्म के बाद हुसैन ने आशा को 6 और फिल्मों ‘जब प्यार किसी से होता है’ (1961), ‘फिर वही दिल लाया हूं’ (1963), ‘तीसरी मंजिल’ (1966), ‘बहारों के सपने’ (1967), ‘प्यार का मौसम’ (1969) और ‘कारवां’ (1971) के लिए साइन कर लिया और सभी ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता बटोरी। इसके अलावा आशा ने अपने करियर में ‘कटी पतंग’, ‘उपकार’, ‘आन मिलो सजना’ और ‘लव इन टोक्यो’ जैसी सुपरहिट फिल्में भी दीं।

1971 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'कटी पतंग' के एक सीन में आशा पारेख और राजेश खन्ना।

1971 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘कटी पतंग’ के एक सीन में आशा पारेख और राजेश खन्ना।

लाइफ टाइम अचीवमेंट और पद्मश्री अवॉर्ड अपने 40 साल के करियर में आशा पारेख ने बॉलीवुड की करीब 95 फिल्मों में काम किया है। आखिरी बार वे साल 1999 में आई फिल्म ‘सर आंखों पर’ में नजर आई थीं। आशा को 11 बार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं 1992 में उन्हें भारत सरकार की ओर से देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया था।

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